होता है इस तरह भी तो कितनों का फ़ैसला,
कव्वे बख़ूबी करते हैं हंसों का फ़ैसला।
अंधेरगर्दी मच रही हर सम्त देखिए
पगडंडियों पे हो रहा रस्तों का फ़ैसला।
इक तानाशाह सत्ता को ठोका नहीं सलाम
मंज़ूर हाथों ने किया कीलों का फ़ैसला।
कमज़ोर की कहीं नहीं सुनवाई आज भी,
चिड़ियों पे थोपा जाता है गिद्धों का फ़ैसला,
No comments:
Post a Comment