Thursday, 3 August 2023

shayri

ज़ख्म ताज़ा तरीन कर लूँ क्या ?
फ़िर किसी पर यक़ीन कर लूँ क्या ?
आदमी हूँ थकन भी होती है 
जिस्म अपना मशीन कर लूँ क्या ?
-संजय तनहा