Thursday, 3 August 2023

shayri

ज़ख्म ताज़ा तरीन कर लूँ क्या ?
फ़िर किसी पर यक़ीन कर लूँ क्या ?
आदमी हूँ थकन भी होती है 
जिस्म अपना मशीन कर लूँ क्या ?
-संजय तनहा 

Friday, 10 March 2023

चंद शेर



होता है इस तरह भी तो कितनों का फ़ैसला,

कव्वे बख़ूबी करते हैं हंसों का फ़ैसला।


अंधेरगर्दी मच रही हर सम्त देखिए

पगडंडियों पे हो रहा रस्तों का फ़ैसला।


इक तानाशाह सत्ता को ठोका नहीं सलाम

मंज़ूर हाथों ने किया कीलों का फ़ैसला।


कमज़ोर की कहीं नहीं सुनवाई आज भी,

चिड़ियों पे थोपा जाता है गिद्धों का फ़ैसला,


Monday, 20 February 2023

शेर

 भूख ग़रीबी सदमात पढा देते हैं।

पुस्तक से अधिक हालात हैं।।

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संजय तन्हा