Thursday, 1 January 2026

shayri

हर अदा देखभाल रक्खी है .
 हमने दुनिया खँगाल रक्खी है.
जितनी नेकी का दम्भ भरते हो, 
उतनी दरिया में डाल रक्खी है.
-संजय तन्हा 

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